भारतीये हॉकी इतिहास के सर्वश्रेष्ठ 5 खिलाड़ी जिन्होंने देश में हॉकी का मान बढ़ाया

भारतीये हॉकी इतिहास के सर्वश्रेष्ठ 5 खिलाड़ी जिन्होंने देश में हॉकी का मान बढ़ाया

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आज हम आपको भारतीय हॉकी इतिहास के टॉप 5 खिलाड़ियों के बारे में बताने जा रहे हैं।
5. उधम सिंह - पंजाब के जालंधर से ताल्लुक रखने वाले उधम सिंह भारतीय हॉकी के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक थे। उनकी हाइट लगभग साढ़े 5 फुट की थी जबकि वजन मात्र 58 किलो था। उन्होंने अपने छोटे कद को अपने खेल के आड़े कभी नहीं आने दिया। उन्होंने अपने कैरियर में तीन ओलंपिक स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। हॉकी से रिटायरमेंट के बाद उधम सिंह मैनेजर के रूप में भारतीय टीम की कमान संभाली। उनके मैनेजर रहते हैं भारत ने मेक्सिको ओलंपिक 1968 में और बैंकॉक 1970 एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था। उधम सिंह ताउम्र भारतीय हॉकी में अपनी सेवा देते रहे।

4. लेस्ली क्लॉडियस - छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में जन्मे लेस्ली क्लॉडियस उधम सिंह के साथ मिलकर सबसे अधिक ओलंपिक मेडल जीता है। लेस्ली ने भी अपने कैरियर में तीन स्वर्ण पदक और एक रजत पदक जीता है। उनके नाम एक अनोखा रिकार्ड दर्ज है जिसमें उन्होंने लगातार चार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। खेल से रिटायरमेंट के बाद भी उन्होंने भारतीय हॉकी में अपना काफी योगदान दिया है।

3. धनराज पिल्लै - बेहद साधारण परिवार में जन्मे धनराज पिल्लै के पिता एक ग्राउंड्स मैन थे जो खेल के मैदानों की देखभाल करते थे। धनराज पिल्लै को आधुनिक भारत के हॉकी का सबसे बड़ा खिलाड़ी माना जाता है ।उन्होंने दिसंबर 1989 में डेब्यू किया और अगस्त 2004 में रिटायरमेंट लिया । धनराज पिल्लै की कप्तानी में भारत ने 1998 का एशियाई खेल और 2003 में एशिया कप जीता था।

2. बलबीर सिंह सीनियर - खेल इतिहास में बलबीर सिंह सीनियर एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने एक ओलंपिक मैच में पांच गोल किए। नीदरलैंड के खिलाफ फाइनल मैच में उन्होंने पांच गोल किए थे। 1956 में हुए मेलबर्न ओलंपिक में उन्होंने भारतीय टीम की कप्तानी की और 1958 तथा 1962 के एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया जिसमें भारत को रजत पदक मिला था।

1. मेजर ध्यानचंद- मेजर ध्यानचंद को उनके शानदार स्किल और बॉल कंट्रोल की वजह से हॉकी का जादूगर कहा जाता था| उनका वास्तविक नाम ध्यान सिंह था। ध्यानचंद दोस्तों द्वारा दिया गया नाम था। ध्यानचंद ने भारत के लिए तीन ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते जिसमें एमस्टरडम (1928) ,लॉस एंजिल्स (1932) और बर्लिन (1936) की ओलंपिक जीत शामिल है। अपने अद्भुत कैरियर में उन्होंने 400 से अधिक गोल किए। हाल ही में भारत सरकार द्वारा राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के नाम को बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया गया है।





October 28, 2021 at 12:33PM

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