11 साल की उम्र में पैरालिसिस होने पर भी अवनि लेखरा ने नहीं मानी हार, पैरालंपिक 2020 में गोल्ड मेडल जीतकर रचा इतिहास
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नई दिल्ली। कह्ते है कि अगर इरादों में दम हो तो कोई भी मुश्किल आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। इसी बात को अवनि लेखरा ने सच साबित कर दिया है। 11 साल की छोटी सी उम्र में एक हादसे में पैरालिसिस का शिकार हुई अवनि ने आज 30 अगस्त 2021 को सिर्फ 19 साल की कम उम्र में जापान के टोक्यो में चल रहें पैरालंपिक 2020 खेलों में गोल्ड मेडल जीतकर कमाल कर दिखाया है।
2012 में हुए एक कार एक्सीडेंट ने बदल दी ज़िंदगी
जयपुर में 8 नवंबर 2001 को जन्मी अवनि के साथ 11 साल की उम्र में ऐसा हादसा हुआ जिसने उनकी ज़िंदगी ही बदल दी। 2012 में एक कार एक्सीडेंट की वजह से अवनि की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई। इस वजह से उनको हमेशा के लिए व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा।
पैरालिसिस के बावजूद नहीं मानी हार
2012 के कार एक्सीडेंट से अवनि ने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू कर दिया।
2015 में शुरू की शूटिंग
13 साल की उम्र से अवनि ने शूटिंग शुरू कर दी। एक इंटरव्यू में अवनि ने बताया कि 2015 में उनके पिता उन्हें जयपुर के जगतपुरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स ले गए। उनके पिता चाहते थे कि वो शूटिंग या तीरंदाजी में से एक खेल चुने। जब अवनि ने पहली बार राइफल पकड़ी तो उन्हें शूटिंग से जुड़ाव महसूस हुआ और उन्होंने शूटिंग की ट्रेनिंग शुरू कर दी।
पहला मेडल उधार की राइफल जीता था
2015 में शूटिंग की ट्रेनिंग शुरू करने के कुछ महीने बाद अवनि ने राजस्थान स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। इस चैंपियनशिप के लिए अवनि के पास राइफल नहीं थी। ऐसे में उन्होंने अपने कोच की राइफल उधार ली और अपने शूटिंग के सफर का पहला गोल्ड मेडल जीता।
पैरालंपिक 2020 में रचा नया इतिहास
अवनि ने पैरालंपिक 2020 गोल्ड मेडल जीतने के साथ ही इतिहास भी रच दिया है। अवनि ने निशाना लगाते हुए कुल 249.6 का स्कोर बनाया जो कि पैरालंपिक खेलों का नया रिकॉर्ड है। इसी के साथ उन्होंने एक और रिकॉर्ड बनाया है। भारत के लिए पैरालंपिक खेलों में गोल्ड मेडल जितने वाली अवनि पहली महिला बन गई है।

August 30, 2021 at 11:54AM
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